इतिहास पर नजर डालें तो साफ होता है कि हम एक ऐसे दौर की शुरुआत में हैं जहां बड़ी कंपनियां मार्केट को लीड करती हैं, मार्केट को मजबूत करती हैं और उसे स्टेबलाइज़ करती हैं। फिर इसके बाद शादी के जश्न में छोटी-मझोली कंपनियां भी बाराती बन कर शामिल हो जाती हैं
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